— समाचार डेस्क
— 15 जुलाई 2020

दृष्टिबाधित आईएएस राजेश सिंह को बोकारो का डीसी बनाया गया है । पहली बार किसी दृष्टिबाधित IAS को किसी जिले का डीसी बनाया गया है, इसलिए इनकी नियुक्ति खास है ।

लेकिन उनके IAS बनने के बाद यह अचानक या एकाएक संभव नहीं हुआ है । देश की सर्वाधिक प्रतिष्ठित नौकरी को पाने के लिए राजेश सिंह को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी है । 2007 में वे यूपीएससी की परीक्षा पास कर IAS बने थे । लेकिन दृष्टिबाधित होने के कारण उनकी नियुक्ति का विरोध किया गया था । बोकारो का डीसी बनने से पहले वे उच्च शिक्षा में विशेष सचिव थे ।

2007 से लेकर 2011 तक कानूनी लड़ाई लड़ी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दृष्टिबाधित राजेश सिंह ने साल 2007 में यूपीएससी की परीक्षा पास की । वे देश के ऐसे पहले दृष्टिबाधित थे, जो IAS बने । लेकिन उनकी नियुक्ति का विरोध किया जाने लगा । तब उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की बेटी डॉ. उपिंदर कौर से मुलाकात की । उनसे सलाह मशविरा के बाद राजेश सुप्रीम कोर्ट पहुंचे । आखिरकार हक की लड़ाई में उनकी जीत हुई । 2011 में उनकी नियुक्ति हुई ।

सुप्रीम कोर्ट में उनके मामले की सुनवाई तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर और अभिजीत पटनायक की बेंच ने की थी । सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार को राजेश सिंह की नियुक्ति करने का निर्देश दिया । अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि IAS के लिए दृष्टि नहीं, दृष्टिकोण की जरूरत होती है, जो राजेश सिंह में है ।

बिहार के हैं राजेश, क्रिकेट खेलते वक्त गई थी आंखों की रौशनी

राजेश सिंह मूल रूप से बिहार के पटना के धनरुआ के रहने वाले हैं । बचपन में इन्हें क्रिकेट खेलने का बहुत शौक था । क्रिकेट खेलते वक्त हुए एक हादसे में इनकी आंखों की रोशनी चली गई थी । लेकिन पढ़ाई में बेहतर राजेश ने पढ़ना हमेशा जारी रखा और उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी और जेएनयू (JNU) से पढ़ाई की । वहीं रहकर UPSC की तैयारी की और 2007 में IAS बने ।