— सौमित्र राय
— 15 जुलाई 2020

यदि आपको 100 रुपए बैंक का ऋण चुकाना है तो यह आपका सिरदर्द है, लेकिन यदि आपको 100 करोड़ रुपए चुकाने हैं तो यह बैंक का सिरदर्द है…

हमारे प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी को आपदा में अवसर करार दिया है। आपके लिए यह कोई अवसर भले न हो, लेकिन कुछ लोगों के लिए ये मौका है लूटने का।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 1 लाख 23 हज़ार करोड़ का लोन माफ किया है। यानी जो पैसा आप अपनी मेहनत की कमाई से बचाकर बैंक में जमा करते हैं, उन्हें कुछ लोग लूटकर भाग गए। स्टेट बैंक इसे लोन माफी नहीं मानती। लेकिन पुणे स्थित सजग नागरिक मंच के विवेक वेलेंकर ने ऐसे दस्तावेज़ पेश किए हैं, जिससे साफ होता है कि बैंक झूठ बोल रहा है।

बैंक 2013 से 2020 तक महज़ 8969 करोड़ का लोन ही वसूल कर पाया है। यह बैंक से लिये गए कुल लोन का 7% है। बाकी 1.23 लाख से ज़्यादा लोन डूब गया।

अब नीचे लगी लिस्ट देखें। लोन किन लोगों ने खाया?

वीडियोकॉन, भूषण पावर एंड स्टील, रिलायंस, जेट एयरवेज, रुचि सोया जैसी कंपनियों को आप दिवालिया समझते हैं? शेयर बाजार में ये कंपनियां अच्छा कमा रहीं हैं। लेकिन लोन नहीं चुकाना चाहतीं। इसी साल अप्रैल में रिज़र्व बैंक ने 68 हज़ार करोड़ से ज़्यादा के लोन माफ किये थे।

ये पैसा किसका है? ये देश की 130 करोड़ जनता का है।

मोदी सरकार की नाक के नीचे से क्या कोई कंपनी लोन डकारकर छूट सकती है? ये कॉर्पोरेट और सरकार की मिलीभगत को दर्शाता है। बिना मिलीभगत के यह संभव नहीं।

आप यकीन नहीं करेंगे कि मोदी सरकार के आने के बाद एक अस्पताल, एक भी स्कूल, एक भी बड़ी यूनिवर्सिटी इसलिए नहीं बनी, क्योंकि विकास में खर्च होने वाला पैसा कंपनियों की उधारी चुकाने में खर्च हो रहा है।

जी हां, आपके टैक्स के पैसे से मोदी सरकार कंपनियों की उधारी चुका रही है। बदले में क्या मिल रहा है? ज़रा सोचकर देखिये कि चुनाव में पानी की तरह बहाने और विधायकों की खरीद-फ़रोख़्त के लिए पैसा कहां से आ रहा है?

RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने मेरी उस बड़ी चिंता पर मुहर लगा दी कि अगले 6 महीने में कई बड़े बैंकों के डूबने के खतरा है। रघुराम राजन ने बैंक के फंसे कर्ज यानी एनपीए को लेकर चेताया है। उन्होंने कहा है कि अगले छह महीने में एनपीए में उल्लेखनीय रूप से बढ़ोतरी हो सकती है।

उन्होंने कहा कि समस्या को जल्दी पहचान लेना सही होगा। कोरोना और उसकी रोकथाम के लिए ‘लॉकडाउन’ से कंपनियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और उनमें से कई के सामने कर्ज की किस्त लौटाने में कठिनाई आ रही है।

राजन ने कहा कि हम समस्या में हैं और जितनी जल्दी इसे पहचान लिया जाएगा उतना बेहतर होगा। क्योंकि हमें वाकई में इस समस्या से निपटने की जरूरत है।

राजन ने कहा, ‘हमें अभी भी लक्षित लोगों को लाभ अंतरण करने में कठिनाई हो रही है। जनधन उस रूप से काम नहीं किया जैसा कि इसका प्रचार-प्रसार किया गया।’

— आलेख में व्यक्त विचारों और तथ्यों के लिए लेखक जवाबदेह होंगे ।