ज्ञानवर्धक आलेख

— संजय कबीर (वरिष्ठ पत्रकार एवं पर्यावरणविद्)
— 13 जुलाई 2020

हम बड़ी चीजों पर ध्यान देते हैं। लेकिन, छोटी चीजें हमारी जान ज्यादा लेती हैं। कोरोना वायरस को ही लें। जिसे देख भी नहीं सकते। उसके चलते दुनिया उल्टी होकर पड़ी है। सीधा होने के लिए कसमसा रही है। जब भी इंसान और जानवरों की लड़ाई की बात आती है। शेर-तेंदुए और हाथी पर ज्यादा निगाहें जाती है। लेकिन, इंसानों की सबसे खतरनाक लड़ाई तो सांपों के साथ चल रही है। एक नये शोध के मुताबिक बीते बीस सालों में भारत में बारह लाख से ज्यादा लोगों की जान सर्पदंश से हुई है।

भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा किए गए इस अध्ययन को ई-लाइफ जर्नल में प्रकाशित किया गया है और भारत के महात्वाकांक्षी मिलियन डेथ स्टडी के डाटा का इसमें प्रयोग किया गया है। सर्पदंश से होने वाली मौतों पर आइये जानते हैं कि इस अध्ययन की मुख्य बातें क्या हैं–

  1. सर्पदंश से होने वाली आधी से ज्यादा मौतें जून से सितंबर तक चलने वाली मानसून सीजन के दौरान होती हैं। क्योंकि इस समय सांपों का बाहर निकलना बढ़ जाता है। ज्यादातर लोगों के पांव में सांप काटता है।
  2. मरने वालों में आधे से ज्यादा लोगों की उम्र तीस से 69 साल के बीच होती है। जबकि, बच्चे भी सर्पदंश का शिकार होते हैं।
  3. सर्पदंश से होने वाली ज्यादातर मौत के लिए रसेल वाइपर, करैत और कोबरा सांप ही जिम्मेदार होते हैं। लेकिन, इनके अलावा 12 अन्य सर्प प्रजातियां भी हैं जिनके चलते इंसानों की मौत होती है।
  4. इनमें से बहुत सारी मौतें सिर्फ इसलिए होती हैं क्योंकि चिकित्सा व्यवस्था बहुत दूर होती है और लोगों को इलाज समय से नहीं मिल पाता है।
  5. रसेल वाइपर आमतौर पर आक्रामक सांप होते हैं और भारत के तमाम हिस्सों में पाए जाते हैं। ये चूहे खाते हैं। चूहे की तलाश में ही ये इंसानों के करीब आ जाते हैं। जिसका परिणाम इंसान और सांप दोनों को भुगतना पड़ता है।
  6. करैत सांप आमतौर पर दिन के समय दब-छिपकर करहता है। लेकिन, रात में इसका व्यवहार बदल जाता है। यह पांच फिट नौ इंच तक लंबा हो सकता है।
  7. कोबरा सांप या नाग आमतौर पर रात के समय काटते हैं और इसके चलते इंटरनल ब्लीडिंग होने लगती है। इसमें तुरंत इलाज की जरूरत होती है।
  8. अध्ययन बताता है कि वर्ष 2001 से 2014 के बीच सर्पदंश से होने वाली सत्तर फीसदी मौतें सिर्फ आठ राज्य—बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, ओडीशा, उत्तर प्रदेश, आंध्राप्रदेश (तेलंगाना भी), राजस्थान और गुजरात शामिल हैं।
  9. सर्पदंश का सबसे ज्यादा खतरा किसानों को होता है। थोड़ी सी जागरुकता बढ़ाकर और कुछ आसान तरीके अपनाकर सर्पदंश से बचा जा सकता है। रबर के बड़े बूट, हाथ में रबर के दस्ताने और टार्च का इस्तेमाल सांप के साथ होने वाले टकराव से बचा सकता है।
  10. दुनिया भर में हर साल 81 हजार से लेकर एक लाख 38 हजार तक लोग सर्पदंश से मरते हैं। जबकि, बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं जिनकी जान तो बच जाती है लेकिन वे हमेशा के लिए विकलांग हो जाते हैं।
  11. इन तमाम बातों के बावजूद सांप किसानों के मित्र होते हैं। वे ईकोसिस्टम में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चूहे जैसे किसानों के दुश्मनों का वे सफाया करके उपज बढ़ाते हैं। उनकी ज्यादातर प्रजातियां जहरीली नहीं होती। इसलिए ज्यादा जरूरत इस बात की है कि उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानें और सतर्क रहें।
    (फोटो जानलेवा रसेल वाइपर की है और इंटरनेट से ली गई है ।)