— अरूण कुमार सिंह
— 14 जुलाई 2020

मेदिनीनगर शहर से लेकर छतरपुर और बिहार की सीमा हरिहरगंज तक पर पुलिस और प्रशासन रात दिन लोगों को सिर्फ यह समझाने में लगा है कि अनावश्यक बाहर मत निकलिये । मास्क लगाईये । सोशल डिस्टेंस मेंटेन करिये । लेकिन जो जनता पिछले तीन महीने में इतनी छोटी सी बात नहीं समझ पायी, वह अभी तक नहीं समझ पा रही है । इससे दुर्भाग्य जनक बात और क्या हो सकती है ?

अधिकतर लोग पढ़े लिखे हैं । अधिकतर हाथों में बित्ता भर का मोबाइल है । आप हर दिन देख रहे हैं, सुन रहे हैं । आपको पता है कि कोरोना की अबतक कोई दवा नहीं आयी । कोई वैक्सिन नहीं है । संबद्ध जांच भी सर्वसुलभ नहीं है । पलामू को ही देखिए । जिला और कुछेक अनुमंडलीय अस्पताल को छोड़कर कई दूरस्थ इलाकों अथवा प्रखंड क्षेत्रों में जांच की सुविधा नहीं है । बिना जांच के, कोई कैसे मान सकता है कि भीड़ में कौन कोरोना पॉजिटिव है कौन नहीं ?

फिर भी, आप भीड़ ही चुनते हैं । पुलिस को सख्त होने पर मजबूर करते हैं । छतरपुर में आज मंगलवारी हाट था । बीस बीस कोस से लोगों का हूजूम बाजार करने आया था । दिनभर स्थानीय पुलिस तबाह रही । सुबह से शाम तक पुलिस ने सैंकड़ों इम्तिहान दिये । तब जाकर बात बनी । आखिर ऐसी कौन सी चीज मंगलवारी हाट में मिलती है जो अन्य दिनों में नहीं मिलती ?

एक पुलिस अधिकारी ने कहा – “भीड़ को समझाते समझाते पुलिस वाले खुद भीड़ का हिस्सा हो गये हैं । लॉक डाउन वन से लेकर अबतक पुलिस आम लोगों को इस महामारी से बचाने के लिए रात दिन सक्रिय हैं । लेकिन पुलिस वालों को ही अगर थोक में…?” इनकी चिंता जायज है ।

चाहे जांच कम होने का नतीजा हो या फिर ईश्वर कृपा, लेकिन अबतक पलामू की स्थिति अच्छी ही कही जाएगी । पिछले 24 घंटे में 6 पॉजिटिव मरीज मिले हैं । अबतक कुल
86 जिनमें 7 एक्टिव मरीज हैं । 73 ठीक होकर घर गये ।

झारखंड को बिहार बनने से बचाईये । बिहार में आज फिर से कोरोना विस्फोट हुआ है । आज बिहार में 1432 मरीज मिले हैं । मुख्य सचिवालय तक पहुंच चुका है कोरोना । पटना के एम्स में एमरजेंसी सेवा बंद हो चुकी है । अब सिर्फ कोरोना मरीजों का ही इलाज होगा । दर्जनों नेता, अधिकारी और पुलिसकर्मी पॉजिटिव हो चुके हैं ।

यह किसी को आजमाने या किसी की अग्नि परीक्षा लेने का वक्त नहीं है । खुद भी संभलिये और दूसरों को भी संभालिए ।